लघु व्यंग्य - सप्लायर
शहर में एक के बाद एक खुलती दूध डेयरी की
दुकानों को लेकर वे बोले – ‘’ यार, बेरोजगार करें भी तो क्या करें। बेचारे छोटी पूंजी
में दूध – दही ही बेच रहे हैं।‘
दूसरे ने चुटकी लेते हुए कहा- ‘’लगता है
आप अभी भी बीसवीं सदी के भोले हैं। अपने इलाके में इतने जानवर नहीं है कि जितनी मात्रा में ये मिल्क प्रोडक्ट के सप्लायर बन बैठे
है।‘’
‘’ वह कैसे?’’
‘’ हम भारतीयों की एक विशेषता है। अगर हमें कोई ‘’कला’’ हाथ लग गई न तो
हम पूरे विश्व को सप्लाइ देने की कुब्बत रखते
हैं। समझे अब ! यानि .. नकली दूध ‘



