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रविवार, 18 अक्तूबर 2015

व्यंग्य- आईडी प्रूफ के घेरे में .......

व्यंग्य- आईडी प्रूफ के घेरे में .......


साहब अगर आप पूछेंगे कि मेरे सामने सबसे बड़ी समस्या क्या है | मैं कहूंगा अपना आई.दी. प्रूफ करते –करते परेशान हो चुका हूँ |
 साहब जिधर जाता हूँ मुझसे मेरी आईडी(पहचान) माँगने वाले घेर लेते हैं | क्या पुलिस क्या दूसरे अफसर |
  अफसर कहता है दफ्तर में आया करो | गले में आईडी कार्ड लटकाकर आया तो करो | ताकि पता चल सके तुम वाही हो जो तुम हो | हमें क्या मालूम कि तुम कौन हो | शर्माजी हो सकते हो , कटारे भी |
 साहब मैं तो कहता हूँ मैं वाही हूँ जो हूँ | पर इस बात को वे नहीं मानते | मेरा आईडी कार्ड प्रूफ कहता है कि मैं कौन हूँ | जैसे जीवित होने का प्रमाण पात्र चिकित्सक देते हैं | बीमार होने प्रमाण पात्र चिकित्सक के देने पर ही आप बीमार कहा सकते हैं |
  उस दिन मैं चाराहे पर कडा था | एक पुलिस वाला मेरे करीब आया | मेरे समक्ष डंडा पटकते हुए पुलिसिया अंदाज में रौबदार स्वर में बोला- ‘’ कौन है बे तू |’
‘’ इसी शहर का सभी नागरिक |’ मैंने म्याऊँ अंदाज में कहा |
 ‘’ अबे हमें क्या पता कि तू सभी है या असभ्य | ‘’ वह बोला | ‘’ सब मैं कह रहा हूँ तो वाही होउंगा भी |’’
 ‘’ अबे ऐसा तो चोर-उचक्के , आंतकवादी , भ्रष्टाचारी , लुच्चे-लफंगे और मनचले भी अपने आपको इस देश में सभी घोषित करते हैं | इस देश में सभी शब्द की बड़ी कीमत है | ‘’ वह एक लंबा सा भाषण थूक की  भाँती मेरी ओर उटचाते हुए बोला | वह आगे बोला-‘ हाँ बोल बे , सच्ची – सच्ची बता तू कौन है | ‘’
 ‘’ साहब , कहा न मैं सीधा-सरल ईमानदार व सभी नागरिक हूँ |’’
 ‘’ अबे देख टाइम खोटी मत कर | सीधी बात कर |’’
‘’ साहब मानी तो सही सही | वैसे भी आप पुलिस के आदमी हैं | आदमी की शक्ल देखकर उसकी असलियत व औकात का पता लगा लेते हैं | वैसे मुझे भी पहचान लीजिए |’’ मैंने कहा |
‘’ अबे , हम क्या आधुनिक जमाने के भविष्य दृष्टा हैं , बाबाओं की तरह हैं जो हाईटेक आश्रमों में रहकर भविष्य दृष्टा बनने की ट्रेनिंग लेकर आते हैं | जो तुझे तेरी शक्ल देखकर पहचान लें | ‘’ वह मूंछ पर हाथ फिराते हुए बोला | देख सही-सही बातकर | वरना मेरा डंडा शुरू हुआ तो तू सब उगल देगा कि कौन है | किस देश का नागरिक है | तेरा पुलिस रिकार्ड कैसा है ? ‘’
 ‘’ साहब मई छोटा मोटा रोजगारी हूँ | ‘’ मैंने मिमयाते हुए कहा | ‘’ साले तुझे समझ में नहीं आ रहा है तू इस देश में रहता है कि विदेश में | तुझे नहीं मालूम आईडी कार्ड साथ में रखे बगैर घूमना आदमी को संदिग्ध बनाता है | चल निकाल अपना आईडी प्रूफ अभी तय कर लेते हैं कि तू कौन है |
 ‘’ साहब वो तो मैं रखा नहीं हूँ |’’
 साले हमें उल्लू समझता है | पुलिस वालों को लल्लू बनाना खूब आता है | चल निकाल आईडी कार्ड बेटा वरना...|’’
 ‘’ साब आईडी कार्ड के अलावा और कोई रास्ता हो तो बताइये मैं प्रूफ करने की कोशिश करूंगा |’’
 ‘’ इसके दो रास्ते हैं |’’
‘’ कौन-कौन से साब |’’
 ‘’ पहला सर्टिफाइड आईडी कार्ड दूसरा गांधी छाप असली नोट |’’
‘’ असली नोट से मतलब साब |’’
 ‘’ असली नोट नहीं जानता | जो नकली नहीं होता उसे असली नोट कहते हैं |’’
‘’ पर मुझे यह कैसे पता चले कि जो मेरे पास हैं वह असली हैं |
‘’ अबे भारतीय नकली नहीं से डरते हैं | अगर तेरे पास नकली है तो तेरे सम्बन्ध अंतर्राष्ट्रीय गिरोह से हो सकते हैं | ‘’ साब नकली नोट तो मार्केट में भी चल रहे हैं |’’
 ‘’ तुझे कैसे पता |’’
 ‘’ अखबार में पढ़ता रहता हूँ |’’
 ‘’ पर समझदार सभी और तेरे जैसे बहस करने वाले इत्ती बड़ी गलती नहीं कर सकते कि नकली नोट लेकर चलें | अब चल छोड़ बहस करना | झट से निकाल अपना आईडी कार्ड |’’
 मैंने जेब से कड़कडाता सौ का गांधी छाप नोट निकालकर उसे थमा दिया | उसने उलट-पुलटकर देखा | आड़े देखा तिरछे देखा | हंसते बोला- ‘’ वाकई तू इस देश का सभी सरल सीधा-सादा, नागरिक है |’’
‘’ आपको कैसे पता चला सर |’’
‘’ तेरा गांधी छाप आईडी प्रूफ बिलकुल असली है |’’

        सुनील कुमार ‘’ सजल’’