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मंगलवार, 2 जून 2015

व्यंग्य –चौबीस घंटे बिजली का सरकारी वायदा


व्यंग्य –चौबीस घंटे बिजली का सरकारी वायदा

ग्रीष्म का आगमन हो चुका है | तपन लू  का दौर | पसीने की धार सी लगी है | इस भीषण ग्रीष्म को देखते हुए सरकार का वायदा है | वह चौबीस  घंटे बिजली देगी |
इधर सरकार ने किया देने का बिजली का वायदा | उधर विपाक्शियों की चिल पों शुरू | ‘’ जनता वायदे के बहकावे में न आए | बिजली का वायदा मात्र चुनावी वायदा है | ‘’ सच भी कहते हैं विपक्षी | चुनाव  की तैयारी में सत्ता पक्ष / सरकारें ऐसे ही उदारवादी वायदों से करती हैं |
 आम आदमी कहता हैं ‘’ क्या बिजली देने मात्र से गरमी घट जाएगी ? साब बजट आने के बाद महंगाई  की तपन से आम आदमी बेहाल है | पंखा कूलर खरीदने के लिए उसे सोचना पड़ता है | बिजली का बढ़ा बिल स्वस्थ व्यक्ति को हार्ट अटैक के दायरे में ला देता है | सच तो यहहै साब सूरज वायदा करे कि वह वैसा न ही तपेगा , जैसा तप रहा है | सरकारें चुनाव आगमन की आहात पर बिजली मसले पर उदारवादी होती हैं | खजाने के पट खुल जाते हैं | बिजली खरीदी के लिए| इधर सरकार दरिया दिल | उधर विद्युत कंपनियों के मन में पलता बढे दाम पर बिल वसूली का पाप | आम उपभोक्ता के लिए तय किए जाते हैं खपत के ऐसे ही रोड ब्रेकर |
सरकारें अक्सर वायदों का ‘रोशनी पर्व’’  चुनाव के वक्त ही अमल में लाती है | बाक़ी समय तो आदमी अँधेरे में ही जीता है | रोशनी के ठेकेदार जानते हैं चार दिन चाँदनी फिर अँधेरी रात का गम चुनाव काल के रोशनी पर्व से गलत किया जा सकता है | कारण देश का उपभोक्ता अगले क्रम को याद रखता है | वैसे भी महापुरुष सीख देते आए हैं | आगे की देखो | पीछे का भूलो | चुनाव के वक्त सरकारें महापुरुषों के पद चिन्हों पर चलने का प्रयास कराती हैं |
यानि पीछे का भूलाने के लिए और आगे का वक्त ठीक रखने के लिए जनता को वर्तमान से फुसलाना शुरू कर देती है | सरकार की चुनावी नीतिओ है | इतनी रोशनी फैलाओ | जनता चकाचौंध में चौंधिया जाए | बीते दिनों के अन्धकार को भूल जाए | बस उसी का उत्सव है | चौबीस घंटे बिजली देने का वायदा |
   इधर साहब को शिकायत है | रातों में उनकी नींद पूरी नहीं होती | वे देर सुबह जागते हैं | कारण यह है कि रातों में बार-बार नींद का टूटना और दफ्तर देर से पहुचने का सिलसिला कई दिनों से चल रहा है | उन्हें गहरी नींद न आने का अर्थ यह न लगाएं कि वे डायबिटीज , हार्ट रोग जैसी बीमारी से ग्रस्त हैं | वस्तुत: वे गरमी से परेशान हैं रातों में बार-बार होने वाले पॉवर कट और बंद होते कूलर एसी. से | जबकि सरकार  चौबीस घंटे बिजली देने के वायदे पर काम कर रही है | वे अनिद्रा की परेशानी पहचान के आम आदमी से बता रहे हैं |
आम आदमी ने कहा –‘’ साब सरकार तो  बिजली चौबीस घंटे दे रही है | फिर भी आप सो नहीं पा रहे है | क्या घर में शीतल प्रदायक यंत्र नहीं है | ‘’ कैसी बात करते हो यार | सब कुछ है |’ साहब बोले |
 ‘’ फिर भी कष्ट ? कहीं अनिद्रा की बीमारी तो नही है आपको ?’’ आम आदमी ने शंका जाहिर की |
‘’ यार तुम जैसे आम आदमी में यहीं पर मूर्खता  झलकती है | सरकारी वायदे या आश्वासन पर खुश होकर गहरी नींद लेने लगते हो |देखते नहीं घंटा भर बिजली रहने  के बाद बीस से चालीस मिनट का पॉवर कट होता रहता है |” साहब तनिक ने खीझकर कहा |
 ‘’ पर हमें तो नींद आती है | साब इत्ता पॉवर कट तो चलता है | फिर नींद लगा जाए तो पॉवर कट रहे या पॉवर प्लस अपने को होश नहीं रहता |’’ आम आदमी ने संतोष भरे स्वर में कहा |
‘’ कैसे इंसान हो यार ? बिजली गुल होने पर नींद नहीं खुलती ? दारू वारू पीकर सोते हो का ? साहब के स्वर में पहले जैसी खीझ | ‘
 ‘’ का है साब कि हम जैसे हर परिस्थितियो में अनुकूल होते हैं | बिजली रहे तो ठीक | न रहे तो ठीक | हर हाल में मस्त होकर जी लेते हैं | ‘’आम आदमी ने कहा |
‘’ तभी तुम सरकार  के वायदे का गुणगान कर रहे हो | सच कहा है किसी ने तुम जैसे लोगों के दम पर लोकतंत्र ज़िंदा है |’’ साहब ने कहा |
   साहब परेशान हैं | रातों में बिजली कि कटौती व् आम आदमी के जवाब से | सरकार खुश है आम आदमी के मुख से उसके गुणगान से | आम आदमी खुश है सरकार के वायदों से | कारण कि आम आदमी सरकारी वायदों पर जीता है |
  अब साहब को पॉवर कट को लेकर नींद न आये  तो सरकार व् आम आदमी क्या करे |
              सुनील कुमार ‘’ सजल’’