लघुव्यंग्य – अंतत:

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सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

लघुव्यंग्य - आदेश


लघुव्यंग्य - आदेश 

सरदार के सामने वे तीनो सर झुकाए खड़े थे || सरदार ने एक-एक के चहरे पर नजर दौडाते हुए कड़क आवाज में प्रश्न किया – ‘’ आज कितनों को लुढ़काकर आए हो |’’


‘’सरदार आठ को |’


‘’क्यों? मैंने तुम्हें तेरह के लिए कहा था न बेवकूफों |’’


‘’ उनमें से पांच तो वैसे भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के कारण मरने योग्य हैं सरदार ....आखिर उनको मारने से  फ़ायदा क्या है |’’


‘’ अरे हरामजादों |’’ सरदार चीखा –‘’ आतंक फैलाने के लिए बीमार व चुस्तों के बीच विभाजन नहीं किया जाता कुत्तों ... अभी जाओ उन्हें भी लुढ़काकर आओ ...वरना उनकी किस्मत की गोली में तुम लोग होगे ....|’’


वे तीनो बिना देरी किये झटपट हथियार उठाकर किसी पालतू कुत्ते को मिले ‘’आदेश’ की तरह चल पड़े उन लोगों की झोपड़ियों की ओर....|


      सुनील कुमार ‘’सजल’’