शनिवार, 6 मई 2017

बात की बात – प्रत्युत्तर

बात  की बात – प्रत्युत्तर
‘’ तुम एक सभ्य  व संस्कारित  घराने के लडके होकर भी हमेशा दूसरों की आलोचना करते व झूठी बातों  को महत्व  देते हुए मिलते हो | तुम्हारी यह आदत ठीक नहीं है | अपनी आदत में सुधार लाओ | ‘’ एक अधेड़ से व्यक्ति ने १८-१९ वर्षीय युवक को डपटते हुए कहा  |
‘’नहीं ला सकता अंकल|’’ उसने मुस्कराकर जवाब दिया |
‘’ क्यों ? ऐसी क्या मजबूरी है ?’’
‘’ मुझे एक सफल राजनीतिज्ञ जो बनाना है |’’
               सुनील कुमार ‘’सजल’’